Sunday, August 18, 2013

इकरारनामा-भाग पांच

मुसबिर, रस्म-ओ -रिवाज़ को तोड़कर घड़ियाँ जो आई है,
बना तस्वीर मेरी, तकदीर से जुदा, फ़तह की.

Tuesday, August 13, 2013

इकरारनामा-भाग चार

बहुत अर्जियां हो गई यार तुमसे,
आंखों में अब तो सपने हलाल हो गये.